अगर आप फिश फार्मिंग में नुकसान नहीं चाहते तो इन प्रोडक्ट के बारे में जान लो

फिश फार्मिंग में कुछ बेसिक बीमारियों के लिए कुछ बेसिक मेडिसिन जरूरी होती है, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। क्योंकि हमारे मछली पालन किसान को दवाइयों के बारे में जानकारी नहीं होती फिर अगर उनकी मछलियां बीमार पड़ती हैं तो उन्हें इस बात का पता नहीं होता कि क्या बीमारी है कौन सी दवाई देनी चाहिए इससे उनको काफी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है।
    नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका अपने ब्लॉग Pvraqua. पर। आज के इस टॉपिक में हम जानेंगे कि फिश फार्मिंग में नुकसान नहीं चाहते तो कौन से प्रोडक्ट के बारे में जानना जरूरी है
अगर आप दवाइयों के इस्तेमाल के बारे में जानेंगे तो इससे फायदा यह होगा कि आपकी मछली की मृत्यु दर कम होगी, FCR बढ़ेगा, प्रॉफिट अच्छा मिलेगा। हम लोग एक एक करके प्रोडक्ट के बारे में जानेंगे।

1. Liv 52-

यह हिमालय कंपनी का प्रोडक्ट है यह मछली के लीवर के फंक्शनैलिटी को इंप्रूव करता है। इससे FCR बढ़ता है और डाइजेशन अच्छा रहता है। सामान्यता हम इसे 10ml/kg Of Feed इस्तेमाल करते हैं। अगर आपकी फेस छोटी है तो हफ्ते में दो बार और बड़ी मछली को हफ्ते में एक बार अपनी Catfish को दें। इससे रिजल्ट बहुत अच्छे मिलेंगे और FCR  बहुत अच्छा आएगा।

2. Himalaya HIM – C

यह नेचुरल इम्यून बूस्टर और ऑक्सीडेंट है। यह मछली को स्ट्रेस फ्री रखता है। अगर हम Intensive Fish Farming करते हैं मतलब की 1 एकड़ में 15-20 हजार मछलियां पालते हैं, तो हमें मछली को Extra विटामिन सी देना पड़ता है। 1gm/kg feed/ week . यह कैटफिश के लिए बहुत आवश्यक है।

3. Yeast Probiotics

Yeast हमारा Probiotics होता है। यह मछली की पाचन क्रिया को बढ़ा देता है। जिससे कि Fish की Growth अच्छी  होती है। 1gm/kg feed में इसे देना चाहिए। जिससे कि मछली कि पाचन क्रिया अच्छी रहे और मछली की प्रोटीन इंटेक अच्छी रहे। इससे हमारी फिश की ग्रोथ अच्छी होगी।

4.BioRemid-Aqua

अगर आपके pond में नाइट्राइट बन रहा हो, और कंट्रोल ना हो रहा हो, जिससे कि मछली कि मृत्यु दर बढ़ गई हो। तो आपको इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। यह प्रोडक्ट बहुत ही अच्छे रिजल्ट देता है। इसके इस्तेमाल से आपके मछली कि मृत्यु दर सून्य हो जाएगी। और आपको बेहतर परिणाम मिल पाएंगे।

5. Zeolite-

जब भी मिनरल का imbalance होता है, तब जियोलाइट इसको balance करने का काम करता है। आपकी Water Body में जितनी Toxic gases होती हैं, ये उनको अब्सर्वे कर लेता है। अगर आपके पोंड में कोई गंध आ रही है, तो ये उसको खत्म कर देता है। जब भी पोंड में अमोनिया बनने लगे तो आपको इस प्रोडक्ट को जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।

6. Himalaya Yucca fresh-

 यह अमोनिया बाइंडर है। हमारे पोंड में जब भी अमोनिया बढ़ती है, तो मछली का मारना शुरू हो जाता है। ऐसे में ये प्रोडक्ट वादान साबित होता है। इसे फीड में 5gm/kg मिला कर देते हैं। ये अमोनिया को फास्ट रिलीव करता है।

7. Kemin enzymes-

यह एक अच्छा एंजाइम प्रोडक्ट है। ये catfish या IMC दोनों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह प्रोडक्ट डाइजेशन के लिए, तथा यूटिलाइजेशन of प्रोटीन के लिए बहुत अच्छा है। आपने देखा होगा कि आपकी मछली ओवर डाइजेशन से मर जाती है, अगर आप इसका इस्तेमाल करेंगे तो इस समस्या से आपको जरूर छुटकारा मिलेगा। इसको 1gm/kg feed में मिला कर देना चाहिए।
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                        https://youtu.be/1XRAQ_zZJPY

 

मछली पालन से अगर कमाना चाहते हैं तो इन बातों का रखें ख्याल

अगर आप मछली पालन कर रहे हैं तो कुछ महत्वपूर्ण बातें आपको अवश्य पता होनी चाहिए । जैसे कि आपको Sampling कैसे करनी है, ग्रेडिंग कैसे करनी है, फर्मेंटेशन कैसे करते हैं, अपने पौंड  का Aeration  कैसे देखना है । यह सब बातें आपको पता होंगी तभी आप एक सफल मछली पालक बन पाएंगे।

दो फ्रेंड्स बने रहिए अपने Blog PvrAqua पर और जानिए मछली पालन से अगर आप कमाना चाहते हैं तो किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है।

1.Pond कैसे बनाएं 

दोस्तों हमें ट्रैक्टर से पोंड बनवाना चाहिए इसके कई फायदे हैं एक तो हमारी लागत कम आएगी जबकि जेसीबी से लागत ज्यादा आती है। पोंड्स में Dicks  का Ratio 3:1 रखना चाहिए। जेसीबी से Pond बनाने में नुकसान यह है की जेसीबी एक ही जगह पर आप की मिट्टी रखती रहती है और जब हम उसमें पानी भरते हैं तो दरारे आ जाती हैं जिससे कि  मेड टूट जाती है। जिसके कारण हमें काफी नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए आप कोशिश करें कि Pond हमेशा ट्रैक्टर से ही बनाएं।

2.Seed Stocking के समय ध्यान दें

जब हम Seed Stocking करते हैं तो ध्यान रखें कि count और Weight  दोनों को Biomass  को ध्यान में रखकर करना चाहिए । ऐसा करने से आने वाले समय में यह फायदेमंद साबित होगा। इससे होगा यह कि आप अपना FCR  और Growth  का अनुमान लगा सकते हैं। ध्यान इस पर ने कि बच्चा जब भी स्टॉक करें तो नर्सरी पाउंड में ही करें पुलिस स्टाफ उसके बाद उसको Grow out Pond  में डालें।

3.Grading Net

यह आपको मार्केट से अलग-अलग साइज में मिल जाएंगे जिससे कि आप ग्रेडिंग कर पाओगे। क्योंकि जब भी आप सीट लगाते हो तो वह समान साइज के नहीं होते सीट हमेशा आपको अलग-अलग साइज के मिलते । तो आपको हमेशा एक समान साइज केसीत 1 पौंड में डालने चाहिए ऐसा इसलिए जरूरी होता है क्योंकि Catfish अपने से छोटी मछली को खा जाती है। अगर ऐसा हुआ तो आपको अवश्य ही नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए ग्रेडिंग करना बहुत जरूरी है । आने वाले समय में जब आप Harvesting करेंगे तब  आपकी मछली का साइज समान मिलेगा। तो आप ग्रेडिंग करें और अलग-अलग प्रकार से पोंड में बच्चे डालें जैसे 5-10 ग्राम के 1 पौंड में, 10-15  ग्राम के अलग Pond  मैं,  इसके लिए बाजार में आपको ऐसे ग्रेडिंग Net  मिल जाएंगे।

4.Aerations

दोस्तों मछली पालन में Aeration का महत्वपूर्ण स्थान है, अगर हम पहले स्थान पर यह देखते हैं अगर हम पहले स्थान पर यह देखते है की हमें Feed अच्छा खिलाना चाइये, तो दूसरे स्थान Aeration का नाम आता है। आप Tank में Culture करें या Pond में Aeration हमें बहुत अच्छा देना चाइये। आपके 1 एकड़ में 1HP आपका 500kg Biomass Increase कर  देता है।

अगर आपने 4HP का Aerator लगाया है तो आप minimum २ टन का Production बढ़ा सकते हैं।  Aerator  के बहुत से फायदे हैं, अगर आप Aerator लगेंगे तो Rich oxygen मिलेगी  pond का DO अधिक रहेगा इससे आपकी मछली Stress Free और Healthy रहेगी।

5.Fermentation

इसके 2 तरीके हैं। अलग – अलग culture के लिए अलग -अलग तरीके से आपको Fermentation करना होगा। अगर आप IMC कर रहे हैं तो आपको एक ड्रम में 1kg Probiotics और 10kg पानी लेना होगा। मतलब आपको 1:10 का ratio रखना चाइये।  इसको मिला कर 24 घंटे के लिए इस मिश्रण को aerate कर लेना चाइये।  जिससे कि Fermentation अच्छे से हो जाये। उसके बाद Pond में सामान रूप दाल देना चाइये। Fermentation की प्रक्रिया कब कैसे करनी चाइये इसके लिए आपको जल्द ही नया Topic मिलेगा जिसमे आपको Fermentation की पूरी जानकारी मिलेगी।

6.Netting

ये  जरूरी प्रक्रिया है। आप IMC करें या Catfish करें लेकिन महीने में एक बार इस प्रक्रिया को आवश्यक रूप से करना चाइये। नेटिंग करने से आपको  की performance पता चल जाती है, की मछली बीमार तो नहीं है। पिछले रिकॉर्ड के अनुसार  पिछले महीने से अब तक कितना Weight Gain  किया है। आपने फीड कितना खिलाया, आपके pond का FCR कितना चल रहा है। ये सब जानकारी आपको नेटिंग में मिल जाती है।

तो दोस्तों ये कुछ बाते हैं जिनको Follow करके आप Maximum Profit उठा सकते हैं। ये छोटी-छोटी बातें हैं लेकिन आपको सफल होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर करना न भूलें इसी जानकारी को वीडियो के रूप में देखने की लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

मछली पालन में लागत और मुनाफा – Costs And Profits In Fisheries

आज के इस टॉपिक में समझाने की कोशिश करेंगे की मछली पालन में कितनी लागत आती है कितना मुनाफा होता है। हम कोई भी बिजनेस फायदे के लिए ही करते है, अगर उस बिजनेस में फायदा ना हो तो हम उसे क्यों करेंगे इसी प्रकार मछली पालन भी इसी तर्ज पर चलता है। आज के इस टॉपिक में हम ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात करेंगे जिन्हें समझ कर आप मछली पालन से मुनाफा बनाने में जरूर सक्षम होंगे। तो जानते हैं मछली पालन में लागत और मुनाफा। दोस्तों स्वागत है आपका आपके ब्लॉग Pvraqua पर

दोस्तों कोई बिजनेस शुरू करने के लिए उसके इंफ्रा की जरूरत होती है उसके लिए एक Setup होना चाहिए जहां की वह बिजनेस सुचारू रूप से चलाया जा सके। इसी प्रकार मछली पालन में भी अलग-अलग प्रकार की पद्धतियां है जिन्हें हम 1-1 कर के जानेंगे तो सबसे पहले बात करते हैं Cage Culture की।

1.Cage Culture

इसमें हमारे पास बड़ी वाटर बॉडी होनी चाहिए जोकि गवर्नमेंट से लीज पर ली जा सकती है। Cage Cultureको आप ऐसे समझिए की वह 96 मीटर का एक खुला कमरा होता है। जोकि पानी में तैरता रहता है। जिसकी 6 मीटर लंबाई, 6 मीटर चौड़ाई, 4 मीटर गहराई होती है और उसके चारों तरफ जाल लगा हुआ होता है। जाल भी चार प्रकार के होते हैं। जिनको हम अच्छे से Case में लगाते हैं। जिससे कि वाटर बॉडी में अगर तूफान या हवा के तेज बहाव आए तो हमारे Case का जाल टूटे ना। और उस वाटर बॉडी की गहराई 70 से 80 फीट होनी चाहिए।

96 मीटर के एक Case से हम 4 टन प्रोडक्शन 8 से 10 महीने में निकाल पाते हैं। यह जानकारी आपको दी है यह मैंने अपने अनुभव और प्रैक्टिकल के आधार पर दी है। हमारे खुद के Cases हैं जिनका प्रोडक्शन लगभग इतना ही रहता है। एक Case की डेवलपमेंट Cost करीब 1 लाख 20 हजार आती है। लेकिन हर चीज के गुण और दोष दोनों होते हैं, इसमें हमें एक साथ 12 Case लगाने अनिवार्य है। मतलब की आप 12 से कम Case नहीं लगा सकते, 12 के मल्टीपल में आप कितने भी लगा सकते हैं परंतु 12 से कम नहीं। क्योंकि फिर आप इसकी लेबर कॉस्टिंग नहीं निकाल पाएंगे। जैसा कि आप लोगों ने सुना होगा लोग कहते हैं कि मैंने फिश फार्मिंग करी और मेरा बिजनेस फेल हो गया उसका कारण यही होता है की वह लोग उसकी कैलकुलेशन नहीं करते जिसकी वजह से यह सब परेशानियां आती है। तो हमारी Case के लिए Per Ton डेवलपमेंट Cost 30 हजार आती है।

2. Pond Culture

अब हम Pond कल्चर की बात करेंगे। हमें एक तालाब कम से कम 1 एकड़ का बनाना चाहिए। इस तालाब को बनाने के लिए हमारी कॉस्टिंग लगभग ढाई लाख रुपए आती है। जिसमें की Pond बनाना, पानी की व्यवस्था करना, शेल्टर बनाना, तथा मोटर का अरेंजमेंट करना भी शामिल है। अगर आप imc पद्धति में फिश फार्मिंग कर रहे हैं तो 1 एकड़ में 5 टन प्रोडक्शन आसानी से निकाल सकते हैं। लेकिन यदि आप Catfish कर रहे हैं तो आप 15 से 18 टन प्रोडक्शन आसानी से निकाल सकते हैं।अगर आप imc कर रहे हैं तो आपके डेवलपमेंट कॉस्ट लगभग 50000 आती है।

3. Biofloc

इसी में तीसरी पद्धति Biofloc है जोकि इस समय बहुत तेजी से चल रहा है। Biofloc मैं छोटे-छोटे वाटर टैंक और छोटी-छोटी वाटर बॉडी बनानी पड़ती है। उसमें 30kg/ मीटर क्यूब के हिसाब से हम बायोमास रेडी कर सकते हैं। इसमें हम कैटफिश का पालन ही करते हैं जिनका साइज 50 ग्राम से 200 ग्राम होता है क्योंकि यही अच्छे से ग्रो कर पाते हैं अगर हम कैलकुलेशन करें तो दो लाख/Ton डेवलपमेंट cost आएगी।

4.IPRS

यह मिनिमम 1 हेक्टेयर का प्रोजेक्ट है । इससे कम मैं शायद आपको उतना अच्छा रिजल्ट नहीं मिलेगा। इसमें जो अच्छी कंपनी है वह एक हेक्टेयर से 70 टन प्रोडक्शन का क्लेम करती हैं और उसकी कॉस्टिंग लगभग ₹9000000 है इसमें हम कैटफिश और IMC का पालन करते हैं।

5.RAS

अगर आप 180 मीटर क्यूब का RAS लगाते हैं तो इसमें हम 50KG/ मीटर क्यूब तक जा सकते हैं। इसके लिए आपको 30 मीटर क्यूब के 6 टैंक लगाने पड़ेंगे और इसकी costing लगभग 75 लाख आती है।

हमें कोई सी भी बात करनी हो उसके लिए सबसे पहले हर पहलू को जांच कर तब की आगे की प्लानिंग करनी चाहिए। हमारे फेलियर का सबसे बड़ा कारण है कि हम कैलकुलेशन नहीं करते हैं कि कितना फंड लगाना है और कितना रिटर्न आएगा। हम शुरु कर देते हैं फिर भी स्टॉक कर लेते हैं लेकिन जब फिश को फीड खिलाने की बारी आती है तो हमें लगता है कि हमारे पास फंड खत्म हो गया है जिसकी वजह से फिश की mortality rate बढ़ती है और मछली अच्छे से ग्रोथ नहीं कर पाती।
जो लोग भी बिना इन चीजों की प्लानिंग के फिश फार्मिंग करते हैं उनको बिजनेस में लॉस होता है और फिर भी बोलते हैं कि बिजनेस फेल हो गया इसे कोई ना करें अगर आपको फैलियर से बचना है तो आपको बेस्ट हेचडी से सीख लेना चाहिए और हर एक कॉस्टिंग की कैलकुलेशन अच्छे से कर लेनी चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं आप समझ गए होंगे कि मछली पालन में लागत और मुनाफे का क्या पैमाना है। जानकारी पसंद आई हो तो शेयर करना ना भूले इसी जानकारी को यदि आप वीडियो के रूप में देखना चाहते हैं तो हमारे Pvraqua के Youtube चैनल पर संपर्क कर सकते हैं इसी जानकारी को वीडियो के रूप में देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें धन्यवाद।

https://www.youtube.com/watch?v=eRm52VoO_Sw

 

 

Fertilization fish ponds.

मछली पालन के लिए तालाब में प्राकृतिक Food कैसे बनाएं ? Fertilization fish ponds.

Fertilization शब्द कहां से आया और इसकी जरूरत है क्यों पड़ी। हमारे जो नेचुरल पहुंच हैं उसमें नेचुरल Feed Develop रहता है। जो मछलियां खाती हैं। एक Feed तो हम Supplementsके रूप में देते हैं और एक Feed Pound हमें नेचुरली बनता रहता है। नेचुरल और सिंथेटिक सब्सटेंस जोकि microorganisms डिवेलप करने के लिए Use होते हैं उन्हें फर्टिलाइजर्स कहते हैं।
हेलो फ्रेंड्स स्वागत है आपका आपके अपने ब्लॉग PvrAqua पर। आज के टॉपिक में हम बात करेंगे की मछली पालन के लिए तालाब में प्राकृतिक Food कैसे बनाएं? तो शुरू करते हैं।
फर्टिलाइजर्स दो प्रकार के होते हैं।
1. ऑर्गेनिक
2. इन ऑर्गेनिक
हमारे पाउंड को Fertilized करने के लिए हमें दोनों की जरूरत होती है। पौंड के फर्टिलाइजेशन के पहले हमें उसका तापमान कैसा है, DO लेवल क्या है, अल्कलिनिटी कैसी है तथा Ph लेवल कितना है इन सब की जांच करनी होगी।
जो ऑर्गेनिक सब्सटेंस है या ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर हैं वे mainly हमारा wastage of cattle, Pig, Poultryआदि सब होता है जिसको हम एक निश्चित मात्रा में यूज करते हैं। सामान्यता 5kg/100 मीटर स्क्वायर मै।
जो ऑर्गेनिक सब्सटेंस हैं उसमें हमारे प्राइम न्यू ट्रेंस जैसे नाइट्रोजन फास्फोरस पोटेशियम आदि हैं इसके अलावा और भी न्यूट्रींस होते हैं जैसे कैल्शियम मैग्नीशियम और सल्फर। तीसरा सब्सटेंस होता है, Molasses। Molasses {मतलब सीरा} रिच कार्बन सोर्स है और इसका उपयोग कार्बन और नाइट्रोजन का रेशियो मेंटेन करने के लिए करते हैं। नाइट्रोजन हमारे पाउंड में पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है मछली के फिकर मटेरियल के कारण और वेस्टीज के कारण नाइट्रोजन अधिक मात्रा में होता है।

Pound मैं fertilization करने के लिए Condition
1. इसके लिए तापमान 16 डिग्री से अधिक होना चाहिए
2. Ph का लेवल 9 से कम होना चाहिए
3. DO 3 mg/liter से अधिक होना चाहिए
4. सचीडिस्क की माप 40cm से अधिक होनी चाहिए।

किसी चीज की अधिकता या कमी दोनों ही पौंड के लिए सही नहीं है। फोन में यह सब चीजें बैलेंस रखने के लिए हमें समय-समय पर पाउंड की जांच करते रहना चाहिए। हमारा पानी पर्याप्त प्लांट वृक्ष है या कम है इसके लिए हम सची डिस्क का उपयोग करते हैं या फिर हम अपने हाथ को पाउंड के पानी में एल्बो तक डालें और अब अगर हम अपने अंगूठे या उंगलियों को देख पा रहे हैं तो उसमें प्लान टोन की कमी है हम उसे फर्टिलाइज करें। अगर हम अपने एल्बो तक हाथ डुबाने के बाद अपनी फिंगर नहीं देख पा रहे हैं तो वहां पर पर्याप्त मात्रा में प्लान टोन मौजूद हैं। यह हमारा नेचुरल फूड है तो अब हमें फर्टिलाइज करने की आवश्यकता नहीं है।
समानता फर्टिलाइजेशन के लिए 6-7 सब्सटेंस उपयोग करने चाहिए। आगे निकल इन ऑर्गेनिक दोनों को यूज करना चाहिए ऑर्गेनिक के लिए Cow Dung या buffaloes Dung का उपयोग कर सकते हैं, और साथ में हमें सरसो की खली २०-०२५ ग्राम और NPK 300-400 ग्राम, सीरा 1 से 1.5 लीटर, खमीर 500 ग्राम इन सब को लेकर एक ड्रम में पानी के साथ मिला कर पानी के साथ २४ घंटे के लिए aeration चलना चाहिए। जिससे की ये पूरा मिश्रण Ferment हो जाये। 24 घंटे बाद दिन के समय में धुप में हमे उसे पूरे तालाब में फैला देना चाहिए। इस मिश्रण को फैलते समाय यह ध्यान रखना चाहिए की ऑक्सीजन का लेवल अच्छा बना रहे। इसके लिए aerators का use करें।
इस क्रिया के द्वारा तालाब में नेचुरल फ़ूड बनता रहेगा और मछली healthy बनी रहेंगी। उम्मीद करते हैं अआप्को जानकारी पसंद आई होगी। धन्यवाद

machli ki shifting

मछली के बच्चे की Shifting के समय ध्यान रखने योग्य बातें

मछली के बच्चे की Shifting के समय ध्यान रखने योग्य बातें

आज के इस टॉपिक में हम बात करेंगे कि कैसे हम अपने Fish Seed को नर्सरी से ग्रोआउट पोंड में कैसे Shift करें,या टैंक से ग्रोआउट पोंड में कल्चर के लिए कैसे Shift करें। दोस्तों स्वागत है आपका आपके Blog PvrAqua पर चलिए जानते हैं, मछली के बच्चे की Shifting के समय ध्यान रखने योग्य बातें

इस प्रक्रिया में 4 दिन का समय लगता है। अगर आप चाहते हैं कि इस प्रक्रिया में को मछली की मृत्यु दर बिल्कुल भी ना हो तो आपको इस प्रक्रिया को फॉलो करना पड़ेगा

 

1.-  पहले दिन हम अपनी मछली की Feeding को 24 घंटे के लिए रोक देंगे मतलब 24 घंटे के लिए हमें मछली को आराम करने के लिए छोड़ देना है उसे कुछ भी खाने के लिए नहीं देना है।

2.-  दूसरे दिन मतलब कि 24 घंटे के बाद हम Netting  करेंगे। सभी Fish Sheed  को जाल में इकट्ठा करेंगे उसके बाद उन बच्चों पर सैनिटाइजर या Disinfectant use करेंगे चाहे वह Cifax  या Promax  कोई भी हो। इसके बाद इसको पानी में मिलाकर मछली के बच्चों पर छिड़काव करेंगे और वापस से बच्चों को जाल में निकाल कर वापस Pound  या टैंक में छोड़ देंगे।

साथ ही यह भी चेक करेंगे कि बच्चों को कोई इंफेक्शन तो नहीं है, जैसे कि लाल चकत्ते, काले धब्बे यह उसकी पूंछ में तो कोई परेशानी नहीं है । अगर इनमें से कोई परेशानी दिखती है तो किसी Aquatant  या डॉक्टर से संपर्क करेंगे या फिर 3 दिन तक एंटीबायोटिक देंगे। इसके लिए  हमें Shifting  को भी Postpone  करना पड़ेगा और अगर हमारा बच्चा परफेक्ट है तो उसे सैनिटाइजर करके वापस Pound या  टैंक में छोड़ देंगे।

3.-  तीसरे दिन हमें कुछ करने की आवश्यक नहीं है क्योंकि आज सिर्फ बच्चे को रिलैक्स करने के लिए छोड़ देना है।

 

4.-  आज जब Sunlight आ जाएगी लगभग 9:00 से 10:00 तक तब हम अपना काम शुरू करेंगे। नर्सरी से Grow out Pound में Shift करेंगे पुलिस स्टाफ इसके लिए कुछ बातें जरूर ध्यान रखनी चाहिए ।

हमें हापे का प्रयोग नहीं करना चाहिए, इसके लिए Bath Tub का प्रयोग करें।

सबसे पहले हमें एक Tub  से दूसरे Tub  मैं डालकर Growout Pound मैं बच्चे को छोड़ देना चाहिए अगर नर्सरी पाउंड और Grow out Pound पास पास में हैं।  लेकिन अगर हमें बच्चे को Travel कराना है एक लोकेशन से दूसरी लोकेशन पर जाना है तो हमें ध्यान रखना होगा कि हमारे बच्चों का body biomass कितना है उसी के अनुसार बच्चे के लिए पानी का इंतजाम करना चाहिए।

दोस्तों यह  पूरी प्रक्रिया 4 दिन की है और इसी प्रकार इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे।  उम्मीद करते हैं आपको जानकारी पसंद आई होगी अधिक जानकारी के लिए हमारे Youtube channel PvrAqua  पर वीडियो देख सकते हैं और हमारे चैनल को Subscribe करना बिल्कुल ना भूलें। धन्यवाद

मछली पालन में ऑक्सीजन की महत्वता

हमारे वातावरण में 21% ऑक्सीजन स्वतंत्र रूप से पाई जाती है। ऑक्सीजन का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसी प्रकार मछली पालन में भी ऑक्सीजन  का बहुत महत्व है। बहुत सारे मछली पालकों की यह शिकायत रहती है, कि हमारे Pond में सभी मछलियां ऊपर घूम गई। हमारे Pond में किसी ने जहर तो नहीं मिला दिया। और भी इसी प्रकार की समस्याएं आती हैं, तो इनका एक ही कारण होता है, ऑक्सीजन की कमी।

तो फ्रेंड्स स्वागत है आपका आपके अपने ब्लॉग PvrAqua पर आज हम जानेंगे कि मछली पालन में ऑक्सीजन का क्या महत्व है तो आइए शुरू करते हैं।

 मछली पालन में ऑक्सीजन का महत्व

मछलियों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत खाने के बाद होती है क्योंकि ऑक्सीजन ही है जिससे खाना पचने में मदद मिलती है। इससे हमारी मछली स्वस्थ बनी रहती है और उसकी अच्छी वृद्धि भी होती है। अभी हम 4 पॉइंट पर बात  करेंगे जिनके कारण  हमारे पौंड में DO ऑक्सीजन लेवल कम होता है।

1.प्रोडक्शन आफ माइक्रो एंड माइक्रो ऑर्गेनाइजेशन

आपके पौंड में मछली रहती है। यह आपको पता है लेकिन मछली के साथ-साथ और छोटे जीव जंतु भी उसी पौंड में रहते हैं और पलते हैं क्योंकि यह सभी सजीव हैं और साँस भी लेते हैं। यह भी एक मुख्य कारण है पौंड के वाटर लेवल में ऑक्सीजन की कमी का।

2.एक समय सीमा पर ऑक्सीजन की कमी

यह देखा गया है कि रात को 2:00 से सुबह के 5:00 बजे तक  हमारे वातावरण मेंऑक्सीजन का लेवल काफी कम हो जाता है। तो इसके लिए हमें जरूर देखना चाहिए कि समय-समय पर हमारे POND की स्थिति कैसी है अक्सर यह समस्या मछली पलकों को आती है जिन्होंने बिना किसी गणना के या बिना Pond की कैपेसिटी जाने ही स्टॉकिंग कर दी है। मतलब कि Pond की कैपेसिटी का उन्हें पता नहीं रहता और कैपेसिटी से अधिक की स्टॉकिंग कर देते हैं। मान लो तालाब की छमता 4000 मछलियों की थी और आपने 12000 मछलियों की स्टॉकिंग कर दी तब क्या होगा। आप की  मछलियों की ग्रोथ नहीं होगी और मछलियां मरने लगेगी क्योंकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी।

3. हमारे POND  जो सिकल मटेरियल होता है उसको डीकंपोज करने के लिए आपको अपने पोंद की ऑक्सीजन को रिच रखना बहुत जरूरी है एक अध्ययन के अनुसार 24 घंटे में एक से 3 मिलीग्राम ऑक्सीजन आपके पाउंड के बॉटम को साफ रखने के लिए आवश्यक होती है

4.फिश की ग्रोथ के लिए आवश्यक ऑक्सीजन

फिश की ग्रोथ के लिए ऑक्सीजन बहुत आवश्यक है, 0.3  मिलीग्राम/KG OF BODY WEIGHT इतनी ऑक्सीजन Fish की ग्रोथ के लिए आवश्यक है। Fish इससे कम ऑक्सीजन पर भी सरवाइव करेंगी। परंतु फीडिंग करानी है तो इतनी ऑक्सीजन बहुत ही आवश्यक है अगर आपका ऑक्सीजन लेवल कम रहेगा तो फिर Fish इंटेक नहीं कर पाएंगी, और ना ही उसकी प्रॉपर ग्रोथ होगी। साथ ही आपने जो भी कैलकुलेशन लगाई होगी, उसके स्टैंडर्ड को फॉलो नहीं करेंगे और आपको लॉस होगा।

TYPES OF OXYGEN ADDITION

फिश फार्मिंग में ऑक्सीजन का पूरा ध्यान रखना होगा इसके लिए Pond में Aerator लगाना अति आवश्यक है।ऑक्सीजन एडिंग दो प्रकार का होता है।

1.नेचुरल प्रोसेस- फ्यूजन ऑफ एयर

जब हवा चलती है तो हवा में जो ऑक्सीजन है वह हमारे पानी में मिक्स हो जाती है लेकिन हमारे बड़े Pond में तो ऑक्सीजन अच्छे से मिक्स होती है, लेकिन छोटे Pond में ऐड होने में प्रॉब्लम आती है।

 

2.आर्टिफिशियल ऑक्सीजन

जब हमारे pond में ऑक्सीजन नेचुरल तरीके से नहीं हो पाती तब हमें आर्टिफिशियल ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ता है। इसका तरीका यह है कि आप हाइड्रोलिक Aerators यूज कर सकते हैं, और यह Aerators अलग-अलग प्रकार के आते हैं।

तो फ्रेंड अगर आपको अच्छी फिश फार्मिंग करनी है और इसमें आपको अच्छी ग्रोथ चाहिए है, तो आपको ऑक्सीजन पर  ध्यान देने की जरूरत है। मछली पालन में ऑक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण है, उम्मीद करते हैं आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। धन्यवाद

मछली पालन के लिए अनिवार्य बातें

मछली पालन के लिए कुछ पैरामीटर्स होते हैं जिन्हें हर मछली पालक को पता होना चाहिए। अगर आप मछली पालन कर रहे हैं, तो ऐसी बेसिक नॉलेज आपके पास होनी ही चाहिए। आज के इस टॉपिक में हम बात करने वाले हैं। मछली पालन के लिए कुछ अनिवार्य बातें तो फ्रेंड्स स्वागत है, आपका आपके अपने Blog Pvraqua पर, तो शुरू करते हैं।

ऐसे बहुत से Fish Farmers हैं, जो मछली पालन कर रहे हैं, और उनके पास बेसिक चीजें जैसे- वाटर टेस्टिंग किट, Ph मीटर, DO ऑक्सीजन  Kit, थर्मामीटर आदि चीजें नहीं हैं। उनकी मछलियों में प्रॉब्लम होती है, मछली की मृत्यु दर बढ़ जाती है। फिर वह किसी से पूछते हैं, कि ऐसा क्यों हो रहा है। इसकी क्या वजह है? तो एक्सपर्ट उनसे पूछता है कि पानी का Ph कितना है, DO क्या है, टेंपरेचर कितना है, तो वह कुछ बता नहीं पाते क्योंकि उनको इस बारे में पता ही नहीं है उनको बेसिक नॉलेज ही नहीं है, और ना ही उनके पास यह सब सामान ही मौजूद है।

तो मेरी आप सब से रिक्वेस्ट है जो भी मछली पालन कर रहे हैं तो उनके पास यह बेसिक  जानकारी के साथ-साथ यह बेसिक  kits  का भी होना बहुत जरूरी है आज हम इन्हीं सब को लेकर कुछ टॉपिक पर बात करेंगे

1  सनलाइट

हमारा एक इकोसिस्टम है जिसमें Living Things और Non Living Things दोनों ही रहते हैं। जिससे हमारा फूड Cycle रोटेट होता रहता है। इसे ही इकोसिस्टम सिस्टम कहते हैं। हमारा पूरा इकोसिस्टम प्रकाश  पर ही निर्भर है। प्रकाश एक ऊर्जा है जो हमें महसूस कराती है कि हमारा टेंपरेचर गर्म है या ठंडा। पूरा इकोसिस्टम तीन Cycle पर चलता है।

कार्बन cycle

वाटर cycle

नाइट्रोजन cycle

आप सबको इन तीनों के बारे में जरूर पढ़ना और जाना चाहिए।

वाटर cycle

जैसा कि आप जानते हैं कि पानी कहीं पर भरा हुआ है फिर  वाष्पोत्सर्जन के जरिए भाग में बदलकर बादल बनता है फिर वह बादल पुनः  पानी के रूप में  बरस जाता है। मतलब कि पानी भाफ बन कर फिर धरती पर बारिश के रूप में आ गया यह cycle चलती रहती है।

कार्बन cycle

कार्बन हर जगह पर पाया जाता है, यह दो रूपों में होता है- फोटोसिंथेसिस  और रेपुटेशन  जैसा कि पेड़ पौधे CO2 लेते हैं और  ऑक्सीजन छोड़ते हैं। उसी प्रकार मनुष्य ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन    डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।  हमारी Fish, feed और ऑक्सीजन लेती हैं तथा CO2 और अमोनिया छोड़ती हैं। यह पूरी कार्बन cycle होती है।

नाइट्रोजन cycle

हमारे वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन है इसमें हमें यह जानना है कि नाइट्रोजन का अमोनिफिकेशन कैसे हो रहा है इसके बाद में नाइट्रिफिकेशन से नाइट्राइट बनता है। इसके बाद ऑक्सीकरण की प्रक्रिया से दोबारा नाइट्रोजन बन जाता है तो इन सब के बारे में आपको अच्छे से पढ़ना और जानना बहुत जरूरी है।

जो भी फिश फार्मिंग करना चाहता है या कर रहा है उसे यह पता होना चाहिए कि  उनके पौंड के bottom मैं अमोनिया कैसे बनता है। यह पता होना चाहिए कि  कब कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा या कम है कब ऑक्सीकरण या  नाइट्रीकरण कराना है।

कार्बन डाइऑक्साइड और  अल्कलिनिटी

यह दोनों हमारे नॉर्मल Aquaculture में जरूरी भूमिका अदा नहीं करते हैं। लेकिन अगर हमारी हेचरी है,  जहाँ हमारी ब्रीडिंग पूल्स हैं, वहाँ पर इनकी बहुत जरूरत होती है। अगर कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा है तो हमारे जो स्पोर्ट्स हैं वह सही से डिवेलप नहीं हो पाते हैं अगर अल्कलिनिटी को देखें तो fry size  मछली  या उससे भी छोटे होते हैं तो उनका सर्वाइवल रेट कम आता है आपने नोटिस किया होगा अगर आप का सीड कोलकाता वगैरह से नॉर्थ इंडिया में आता है तो शुरुआत में मृत्यु दर बहुत अधिक रहती है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां पर अल्कलिनिटी बहुत कम है और हमारे यहां बहुत अधिक

तापमान

टेंपरेचर Aquaculture के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है तापमान की माप के लिए हमारे पास थर्मामीटर होना चाहिए जिसके द्वारा हम समय-समय पर अपने तालाब या पाउंड का आप चेक कर सके मछली पालन के लिए पानी का टेंपरेचर 20 डिग्री से 28 डिग्री होना चाहिए इससे कम या ज्यादा टेंपरेचर fish  की मेटाबॉलिज्म  के लिए अच्छा नहीं होता है

 Ph लेवल

अगर हम पीएच लेवल की बात करें तो 7:00 से 9:00 तक अच्छा माना जाता है अगर पीएच 9.5 से अधिक है तब यह मछलियों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है इसकी बॉडी  का ph4 से 4.5  होता है। अगर पीएच को देखें तो बॉडी से वाटर का पीएच अधिक होना चाहिए पानी का पीएच अगर कम है तो उसमें तू ना मिलाया जाता है अगर अधिक है तो उसमें जिप्सम मिलाते हैं।

 Areation for D O

मछली पालन में  DO  बहुत महत्व है कुछ मछली पालन तालाब को तैयार करते हैं किंतु उस में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं करते। ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए अगर आप सीजन का लेवल अधिक रहेगा तो अमोनिया बढ़ने के चांस बहुत कम रहते हैं। फिश प्रोडक्शन भी बढ़ता है तो आपको Areation पर जरूर ध्यान देना चाहिए आप आर्टिफिशियल Areation   दे  या नेचुरलAreation   पर इसका प्रबंध जरूर करें

Feeding

फीडिंग फिश फार्मिंग में बहुत अहम भूमिका निभाता है सिडको 4 कैटेगरी में बांटना चाहिए 1 एमएम 2 एमएम 3 एमएम 4 एमएम जैसे-जैसे फेस का साइज बढ़ता है फिर का साइज भी बढ़ाना चाहिए सीट कितना कब और किस मात्रा में देना चाहिए इसके लिए आपको डिटेल में अगले टॉपिक में जानने को मिलेगा।

 सैलिनिटी

इसका मतलब   साल्ट का कितना कंपोजीशन पानी में है अगर हम  महीने में एक बार नमक मिला दें तो तालाब में फंगल इन्फेक्शन को रोका जा सकता है हमें इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

तो फ्रेंड यह कुछ बेसिक प्वाइंट थे जिन्हें फिश फार्मिंग करते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हमें फिश फार्मिंग करनी है या कर रहे हैं तो  इस बेसिक जानकारी का होना बहुत जरूरी है। अगर जानकारी पसंद आई हो तो इसे शेयर करना बिल्कुल ना भूलें धन्यवाद

 

Biofloc PVR Aqua

मछली पालन की विधि क्या है मछली पालन कहां करें कब करें और कैसे करें

हेलो फ्रेंड्स स्वागत है आपका अपने Blog PvrAqua  पर,  यहां पर आपको मछली पालन से संबंधित सभी जानकारियां मिलती हैं। आज हम बात करेंगे Fish Farming Overview की। मतलब कि आप इस टॉपिक में जानेंगे कि मछली पालन की विधि क्या है मछली पालन कहां करें कब करें और कैसे करें तो शुरू करते हैं।

    मछली पालन की बहुत सी पद्धतियां हैं जिनके द्वारा मछली पाली जाती हैं। इसमें से 4 तरीके मुख्य हैं, जिनको आप लोगों ने फेसबुक, यूट्यूब आदि जगहों पर देखा सुना होगा।

मछली पालन के तरीके

Biofloc Technology

यह केमिकल Solution Base तरीका है, यह काफी फेमस है। इसके बारे में हम अपने अगले टॉपिक पर विस्तार से जानेंगे।

 RAS Culture

इसके बारे में भी आपने बहुत सुना होगा यह एक मैकेनिकल सलूशन है, जिसमें हम मशीनों के द्वारा पानी को साफ करते  हैं।

 Case Culture

 इसमें हम case के छोटे-छोटे फ्लोटिंग बॉडी के रूम बना लेते हैं। जो बड़े रिजर्वॉयर या डैम हैं, उनमें यह पालन पालन होता है। जिसमें कि मछलियां पकड़ी जा सकें। बड़े डैम या रिजर्वायर से मछली पकड़ने में बहुत परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए Case Culture की उत्पत्ति हुई।

Pond culture

 यह पद्धति सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा प्रचलित है, इसे बड़ी आसानी से किया जा सकता है। इसे अपने गांव के तालाब में या अपने खेतों में  तालाब बनाकर भी किया जा सकता है।

 फिश फार्मिंग क्यों करें

अगर हम देखें कि हमें मछली  पालन क्यों करना चाहिए, तो अगर आप अपने क्षेत्र की नॉर्मल फसल को लें जैसे कि अगर आप उत्तर भारत से हैं, तो आपको आपकी मेन फसल गन्ना, गेहूं, धान आदि होंगे। अगर मछली पालन की तुलना इन फसलों से करें तो आप पाएंगे कि फिश फार्मिंग में अन्य की तुलना में  4 गुना अधिक मुनाफा है।  मतलब साफ है इसमें आप अधिक प्रॉफिट उठा सकते हैं। हमारे भारत में मछली का 12 मिलियन मेट्रिक टन प्रोडक्शन होता है। जिसमें से लगभग 70  प्रतिशत मतलब 8.5 मिलियन मेट्रिक टन प्रोडक्शन इन्ही चारों पद्धतियों से होता है। बाकी के 30 % समुद्री मछलियों से आता है।

         अगर आप देखोगे तो पाओगे कि Fish Farming Industry Unorganized  है। फिर भी फिश फार्मिंग और उसके प्रोडक्ट्स से 45000 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हर साल करते हैं। अब आप इसकी वॉल्यूम और क्षमता को बस इमेजिन करिए। 10 से 12% की ग्रोथ हर साल इस इंडस्ट्री से हो रही है। आप किसी भी इंडस्ट्री से हों, अगर आप किसी प्रकार की चीज का प्रोडक्शन कर रहे हैं, तो आपको एक मार्केट चाहिए होती है। जहां पर आप उस सामान को बेच सकें। लेकिन इस मार्केट में डिमांड और सप्लाई का Hues Gap है।  इसमें प्रोडक्शन 12 मिलियन मेट्रिक टन है, और  कंजप्शन 20 मिलियन मेट्रिक टन  है। तो आपके पास मार्केट पहले से बना हुआ है, जहां आप अपनी मछली को आसानी से  बेच सकते हैं। भारत में मछली का पर कैपिटा प्रोडक्शन 6.5 KG है। जो कि विश्व स्तर के हिसाब से बहुत कम है। विश्व में मछली का प्रोडक्शन  20 किलो है। तो हमारे पास बहुत से ऐसे कारण हैं जिससे कि हम यह समझ सकते हैं, कि हमें मछली पालन क्यों करना चाहिए।

 मछली पालन कहां करें

मछली पालन कहां करें इसके लिए हमें पहले यह देखना होगा, कि जो  मछली पालन की चार पद्धतियां बताई गई हैं, उस में से किस पद्धति में आपको पालन करना है। उसी के अनुसार ही हमें अपनी लोकेशन निर्धारित करनी चाहिए। मछली पालन के लिए हमारे पास सबसे पहले साइट  सिलेक्शन होनी चाहिए अगर  हमें केज कल्चर करना है, तो हमारे पास रिजर्व वायर या डैम होना चाहिए जो कि आसानी से सरकार से लीज पर मिल जाए।

      अगर आपको RAS फार्मिंग करनी है, तो ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पर बिजली की समुचित व्यवस्था हो। क्योंकि RAS मैकेनिकल बेस पर आधारित है। तो बिजली का होना सर्वप्रथम आवश्यक है। क्योंकि मछली को  एरिशन  मतलब ऑक्सीजन देना पड़ेगा।  साथ ही ऐसी जगह चुननी चाहिए, कि भविष्य में जब हमें उस जगह को बढ़ाना हो तो आसानी से बढ़ाया जा सके।

   दूसरी शर्त यह है कि ट्रांसपोर्ट की दृष्टि से जगह ऐसी होनी चाहिए जहां पर वाहन आसानी से पहुंच सके। सीड सप्लाई के लिए वहां पर एक हेचडी होनी चाहिए, ऐसा ना हो कि आप ऐसी जगह सेलेक्ट करें, जहां पर वाहन या बिजली की कनेक्टिविटी ही ना हो। तो हमें लोकेशन आईडेंटिफाई करने से पहले इन सब चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

 मछली पालन कब करें

 मछली पालन कब करें, यह डिसाइड करने के लिए हमें टेंपरेचर और क्लाइमेट का बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हम उत्तर भारत में कर रहे हैं तो यह मान के चलिए कि आपका कल्चर का समय 9 महीने का ही होगा। क्योंकि नवंबर, दिसंबर और जनवरी में सर्दी कितनी पड़ती है, कि इन 3 महीनों में कल्चर नहीं होगा। कुछ जो कैट फिश मछली होती हैं वह इस मौसम में सरवाइव नहीं  करेंगी।  बाकी मछली जैसे IMC या CARP FISH हैं, वह सरवाइव तो करेंगी, लेकिन उनकी ग्रोथ नहीं होगी। तो हमें पर्फेक्ट समय के हिसाब से सीड को स्टार्ट करना, हार्वेस्ट करना और सेल करना चाहिए।

         हमारा टारगेट होना चाहिए की मार्च-अप्रैल तक  सीड को स्टॉक कर लें तथा नवंबर तक उसे हार्वेस्ट कर देना चाहिए। दक्षिण भारत का जो मौसम है वह इस प्रकार का है कि वहां पर 12 महीने मछली पालन कर सकते हैं। तो वहां पर कोई परेशानी नहीं आती है।

 इसके साथ ही हमारे साथ अच्छा कंसलटेंट होना चाहिए या एक अच्छा डॉक्टर होना चाहिए या फिर हमने खुद अच्छी ट्रेनिंग ली हो। क्योंकि कोई भी बिजनेस पार्ट टाइम बिजनेस नहीं होता है, जब तक हमें उस बिजनेस की बेसिक ना पता हो, तब तक हमें उस बिजनेस को नहीं करना चाहिए, नहीं तो नुकसान के चांसेस बढ़ जाते हैं।

 निष्कर्ष

  मछली पालन करने से पहले हमें यह सब शर्तें तो देखनी ही चाहिए। साथ में फिश फार्मिंग की इकोनॉमिक्स को भी समझना चाहिए। जो भी फिश फार्मिंग करना चाहता है, अगर वह मतष्य परिवार से नहीं है, तो  सबसे पहले फिश इकोनॉमिक्स को  समझना पड़ेगा। आप क्या इनपुट लगाएंगे? आपको क्या आउटपुट मिलेगा? तथा इन सब चीजों से क्या प्रॉफिट होगा। क्योंकि कोई भी बिजनेस प्रॉफिट के लिए ही किया जाता है। फिश फार्मिंग का पूरा बिजनेस ऑपरेशन पर आधारित है तथा पूरी Coasting का लगभग 75% ऑपरेशन में ही लग जाता है। अब अगर प्रॉफिट की बात करें, तो 40 से 45% तक प्रॉफिट निकल कर आता है।

         अब आप समझ गए होंगे कि मछली पालन की विधि क्या है? मछली पालन कहां करें, कब करें और कैसे करें। अगर जानकारी आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद