मछली पालन में ऑक्सीजन की महत्वता

हमारे वातावरण में 21% ऑक्सीजन स्वतंत्र रूप से पाई जाती है। ऑक्सीजन का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसी प्रकार मछली पालन में भी ऑक्सीजन  का बहुत महत्व है। बहुत सारे मछली पालकों की यह शिकायत रहती है, कि हमारे Pond में सभी मछलियां ऊपर घूम गई। हमारे Pond में किसी ने जहर तो नहीं मिला दिया। और भी इसी प्रकार की समस्याएं आती हैं, तो इनका एक ही कारण होता है, ऑक्सीजन की कमी।

तो फ्रेंड्स स्वागत है आपका आपके अपने ब्लॉग PvrAqua पर आज हम जानेंगे कि मछली पालन में ऑक्सीजन का क्या महत्व है तो आइए शुरू करते हैं।

 मछली पालन में ऑक्सीजन का महत्व

मछलियों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत खाने के बाद होती है क्योंकि ऑक्सीजन ही है जिससे खाना पचने में मदद मिलती है। इससे हमारी मछली स्वस्थ बनी रहती है और उसकी अच्छी वृद्धि भी होती है। अभी हम 4 पॉइंट पर बात  करेंगे जिनके कारण  हमारे पौंड में DO ऑक्सीजन लेवल कम होता है।

1.प्रोडक्शन आफ माइक्रो एंड माइक्रो ऑर्गेनाइजेशन

आपके पौंड में मछली रहती है। यह आपको पता है लेकिन मछली के साथ-साथ और छोटे जीव जंतु भी उसी पौंड में रहते हैं और पलते हैं क्योंकि यह सभी सजीव हैं और साँस भी लेते हैं। यह भी एक मुख्य कारण है पौंड के वाटर लेवल में ऑक्सीजन की कमी का।

2.एक समय सीमा पर ऑक्सीजन की कमी

यह देखा गया है कि रात को 2:00 से सुबह के 5:00 बजे तक  हमारे वातावरण मेंऑक्सीजन का लेवल काफी कम हो जाता है। तो इसके लिए हमें जरूर देखना चाहिए कि समय-समय पर हमारे POND की स्थिति कैसी है अक्सर यह समस्या मछली पलकों को आती है जिन्होंने बिना किसी गणना के या बिना Pond की कैपेसिटी जाने ही स्टॉकिंग कर दी है। मतलब कि Pond की कैपेसिटी का उन्हें पता नहीं रहता और कैपेसिटी से अधिक की स्टॉकिंग कर देते हैं। मान लो तालाब की छमता 4000 मछलियों की थी और आपने 12000 मछलियों की स्टॉकिंग कर दी तब क्या होगा। आप की  मछलियों की ग्रोथ नहीं होगी और मछलियां मरने लगेगी क्योंकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी।

3. हमारे POND  जो सिकल मटेरियल होता है उसको डीकंपोज करने के लिए आपको अपने पोंद की ऑक्सीजन को रिच रखना बहुत जरूरी है एक अध्ययन के अनुसार 24 घंटे में एक से 3 मिलीग्राम ऑक्सीजन आपके पाउंड के बॉटम को साफ रखने के लिए आवश्यक होती है

4.फिश की ग्रोथ के लिए आवश्यक ऑक्सीजन

फिश की ग्रोथ के लिए ऑक्सीजन बहुत आवश्यक है, 0.3  मिलीग्राम/KG OF BODY WEIGHT इतनी ऑक्सीजन Fish की ग्रोथ के लिए आवश्यक है। Fish इससे कम ऑक्सीजन पर भी सरवाइव करेंगी। परंतु फीडिंग करानी है तो इतनी ऑक्सीजन बहुत ही आवश्यक है अगर आपका ऑक्सीजन लेवल कम रहेगा तो फिर Fish इंटेक नहीं कर पाएंगी, और ना ही उसकी प्रॉपर ग्रोथ होगी। साथ ही आपने जो भी कैलकुलेशन लगाई होगी, उसके स्टैंडर्ड को फॉलो नहीं करेंगे और आपको लॉस होगा।

TYPES OF OXYGEN ADDITION

फिश फार्मिंग में ऑक्सीजन का पूरा ध्यान रखना होगा इसके लिए Pond में Aerator लगाना अति आवश्यक है।ऑक्सीजन एडिंग दो प्रकार का होता है।

1.नेचुरल प्रोसेस- फ्यूजन ऑफ एयर

जब हवा चलती है तो हवा में जो ऑक्सीजन है वह हमारे पानी में मिक्स हो जाती है लेकिन हमारे बड़े Pond में तो ऑक्सीजन अच्छे से मिक्स होती है, लेकिन छोटे Pond में ऐड होने में प्रॉब्लम आती है।

 

2.आर्टिफिशियल ऑक्सीजन

जब हमारे pond में ऑक्सीजन नेचुरल तरीके से नहीं हो पाती तब हमें आर्टिफिशियल ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ता है। इसका तरीका यह है कि आप हाइड्रोलिक Aerators यूज कर सकते हैं, और यह Aerators अलग-अलग प्रकार के आते हैं।

तो फ्रेंड अगर आपको अच्छी फिश फार्मिंग करनी है और इसमें आपको अच्छी ग्रोथ चाहिए है, तो आपको ऑक्सीजन पर  ध्यान देने की जरूरत है। मछली पालन में ऑक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण है, उम्मीद करते हैं आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। धन्यवाद

मछली पालन के लिए अनिवार्य बातें

मछली पालन के लिए कुछ पैरामीटर्स होते हैं जिन्हें हर मछली पालक को पता होना चाहिए। अगर आप मछली पालन कर रहे हैं, तो ऐसी बेसिक नॉलेज आपके पास होनी ही चाहिए। आज के इस टॉपिक में हम बात करने वाले हैं। मछली पालन के लिए कुछ अनिवार्य बातें तो फ्रेंड्स स्वागत है, आपका आपके अपने Blog Pvraqua पर, तो शुरू करते हैं।

ऐसे बहुत से Fish Farmers हैं, जो मछली पालन कर रहे हैं, और उनके पास बेसिक चीजें जैसे- वाटर टेस्टिंग किट, Ph मीटर, DO ऑक्सीजन  Kit, थर्मामीटर आदि चीजें नहीं हैं। उनकी मछलियों में प्रॉब्लम होती है, मछली की मृत्यु दर बढ़ जाती है। फिर वह किसी से पूछते हैं, कि ऐसा क्यों हो रहा है। इसकी क्या वजह है? तो एक्सपर्ट उनसे पूछता है कि पानी का Ph कितना है, DO क्या है, टेंपरेचर कितना है, तो वह कुछ बता नहीं पाते क्योंकि उनको इस बारे में पता ही नहीं है उनको बेसिक नॉलेज ही नहीं है, और ना ही उनके पास यह सब सामान ही मौजूद है।

तो मेरी आप सब से रिक्वेस्ट है जो भी मछली पालन कर रहे हैं तो उनके पास यह बेसिक  जानकारी के साथ-साथ यह बेसिक  kits  का भी होना बहुत जरूरी है आज हम इन्हीं सब को लेकर कुछ टॉपिक पर बात करेंगे

1  सनलाइट

हमारा एक इकोसिस्टम है जिसमें Living Things और Non Living Things दोनों ही रहते हैं। जिससे हमारा फूड Cycle रोटेट होता रहता है। इसे ही इकोसिस्टम सिस्टम कहते हैं। हमारा पूरा इकोसिस्टम प्रकाश  पर ही निर्भर है। प्रकाश एक ऊर्जा है जो हमें महसूस कराती है कि हमारा टेंपरेचर गर्म है या ठंडा। पूरा इकोसिस्टम तीन Cycle पर चलता है।

कार्बन cycle

वाटर cycle

नाइट्रोजन cycle

आप सबको इन तीनों के बारे में जरूर पढ़ना और जाना चाहिए।

वाटर cycle

जैसा कि आप जानते हैं कि पानी कहीं पर भरा हुआ है फिर  वाष्पोत्सर्जन के जरिए भाग में बदलकर बादल बनता है फिर वह बादल पुनः  पानी के रूप में  बरस जाता है। मतलब कि पानी भाफ बन कर फिर धरती पर बारिश के रूप में आ गया यह cycle चलती रहती है।

कार्बन cycle

कार्बन हर जगह पर पाया जाता है, यह दो रूपों में होता है- फोटोसिंथेसिस  और रेपुटेशन  जैसा कि पेड़ पौधे CO2 लेते हैं और  ऑक्सीजन छोड़ते हैं। उसी प्रकार मनुष्य ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन    डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।  हमारी Fish, feed और ऑक्सीजन लेती हैं तथा CO2 और अमोनिया छोड़ती हैं। यह पूरी कार्बन cycle होती है।

नाइट्रोजन cycle

हमारे वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन है इसमें हमें यह जानना है कि नाइट्रोजन का अमोनिफिकेशन कैसे हो रहा है इसके बाद में नाइट्रिफिकेशन से नाइट्राइट बनता है। इसके बाद ऑक्सीकरण की प्रक्रिया से दोबारा नाइट्रोजन बन जाता है तो इन सब के बारे में आपको अच्छे से पढ़ना और जानना बहुत जरूरी है।

जो भी फिश फार्मिंग करना चाहता है या कर रहा है उसे यह पता होना चाहिए कि  उनके पौंड के bottom मैं अमोनिया कैसे बनता है। यह पता होना चाहिए कि  कब कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा या कम है कब ऑक्सीकरण या  नाइट्रीकरण कराना है।

कार्बन डाइऑक्साइड और  अल्कलिनिटी

यह दोनों हमारे नॉर्मल Aquaculture में जरूरी भूमिका अदा नहीं करते हैं। लेकिन अगर हमारी हेचरी है,  जहाँ हमारी ब्रीडिंग पूल्स हैं, वहाँ पर इनकी बहुत जरूरत होती है। अगर कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा है तो हमारे जो स्पोर्ट्स हैं वह सही से डिवेलप नहीं हो पाते हैं अगर अल्कलिनिटी को देखें तो fry size  मछली  या उससे भी छोटे होते हैं तो उनका सर्वाइवल रेट कम आता है आपने नोटिस किया होगा अगर आप का सीड कोलकाता वगैरह से नॉर्थ इंडिया में आता है तो शुरुआत में मृत्यु दर बहुत अधिक रहती है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां पर अल्कलिनिटी बहुत कम है और हमारे यहां बहुत अधिक

तापमान

टेंपरेचर Aquaculture के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है तापमान की माप के लिए हमारे पास थर्मामीटर होना चाहिए जिसके द्वारा हम समय-समय पर अपने तालाब या पाउंड का आप चेक कर सके मछली पालन के लिए पानी का टेंपरेचर 20 डिग्री से 28 डिग्री होना चाहिए इससे कम या ज्यादा टेंपरेचर fish  की मेटाबॉलिज्म  के लिए अच्छा नहीं होता है

 Ph लेवल

अगर हम पीएच लेवल की बात करें तो 7:00 से 9:00 तक अच्छा माना जाता है अगर पीएच 9.5 से अधिक है तब यह मछलियों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है इसकी बॉडी  का ph4 से 4.5  होता है। अगर पीएच को देखें तो बॉडी से वाटर का पीएच अधिक होना चाहिए पानी का पीएच अगर कम है तो उसमें तू ना मिलाया जाता है अगर अधिक है तो उसमें जिप्सम मिलाते हैं।

 Areation for D O

मछली पालन में  DO  बहुत महत्व है कुछ मछली पालन तालाब को तैयार करते हैं किंतु उस में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं करते। ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए अगर आप सीजन का लेवल अधिक रहेगा तो अमोनिया बढ़ने के चांस बहुत कम रहते हैं। फिश प्रोडक्शन भी बढ़ता है तो आपको Areation पर जरूर ध्यान देना चाहिए आप आर्टिफिशियल Areation   दे  या नेचुरलAreation   पर इसका प्रबंध जरूर करें

Feeding

फीडिंग फिश फार्मिंग में बहुत अहम भूमिका निभाता है सिडको 4 कैटेगरी में बांटना चाहिए 1 एमएम 2 एमएम 3 एमएम 4 एमएम जैसे-जैसे फेस का साइज बढ़ता है फिर का साइज भी बढ़ाना चाहिए सीट कितना कब और किस मात्रा में देना चाहिए इसके लिए आपको डिटेल में अगले टॉपिक में जानने को मिलेगा।

 सैलिनिटी

इसका मतलब   साल्ट का कितना कंपोजीशन पानी में है अगर हम  महीने में एक बार नमक मिला दें तो तालाब में फंगल इन्फेक्शन को रोका जा सकता है हमें इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

तो फ्रेंड यह कुछ बेसिक प्वाइंट थे जिन्हें फिश फार्मिंग करते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हमें फिश फार्मिंग करनी है या कर रहे हैं तो  इस बेसिक जानकारी का होना बहुत जरूरी है। अगर जानकारी पसंद आई हो तो इसे शेयर करना बिल्कुल ना भूलें धन्यवाद

 

Biofloc PVR Aqua

मछली पालन की विधि क्या है मछली पालन कहां करें कब करें और कैसे करें

हेलो फ्रेंड्स स्वागत है आपका अपने Blog PvrAqua  पर,  यहां पर आपको मछली पालन से संबंधित सभी जानकारियां मिलती हैं। आज हम बात करेंगे Fish Farming Overview की। मतलब कि आप इस टॉपिक में जानेंगे कि मछली पालन की विधि क्या है मछली पालन कहां करें कब करें और कैसे करें तो शुरू करते हैं।

    मछली पालन की बहुत सी पद्धतियां हैं जिनके द्वारा मछली पाली जाती हैं। इसमें से 4 तरीके मुख्य हैं, जिनको आप लोगों ने फेसबुक, यूट्यूब आदि जगहों पर देखा सुना होगा।

मछली पालन के तरीके

Biofloc Technology

यह केमिकल Solution Base तरीका है, यह काफी फेमस है। इसके बारे में हम अपने अगले टॉपिक पर विस्तार से जानेंगे।

 RAS Culture

इसके बारे में भी आपने बहुत सुना होगा यह एक मैकेनिकल सलूशन है, जिसमें हम मशीनों के द्वारा पानी को साफ करते  हैं।

 Case Culture

 इसमें हम case के छोटे-छोटे फ्लोटिंग बॉडी के रूम बना लेते हैं। जो बड़े रिजर्वॉयर या डैम हैं, उनमें यह पालन पालन होता है। जिसमें कि मछलियां पकड़ी जा सकें। बड़े डैम या रिजर्वायर से मछली पकड़ने में बहुत परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए Case Culture की उत्पत्ति हुई।

Pond culture

 यह पद्धति सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा प्रचलित है, इसे बड़ी आसानी से किया जा सकता है। इसे अपने गांव के तालाब में या अपने खेतों में  तालाब बनाकर भी किया जा सकता है।

 फिश फार्मिंग क्यों करें

अगर हम देखें कि हमें मछली  पालन क्यों करना चाहिए, तो अगर आप अपने क्षेत्र की नॉर्मल फसल को लें जैसे कि अगर आप उत्तर भारत से हैं, तो आपको आपकी मेन फसल गन्ना, गेहूं, धान आदि होंगे। अगर मछली पालन की तुलना इन फसलों से करें तो आप पाएंगे कि फिश फार्मिंग में अन्य की तुलना में  4 गुना अधिक मुनाफा है।  मतलब साफ है इसमें आप अधिक प्रॉफिट उठा सकते हैं। हमारे भारत में मछली का 12 मिलियन मेट्रिक टन प्रोडक्शन होता है। जिसमें से लगभग 70  प्रतिशत मतलब 8.5 मिलियन मेट्रिक टन प्रोडक्शन इन्ही चारों पद्धतियों से होता है। बाकी के 30 % समुद्री मछलियों से आता है।

         अगर आप देखोगे तो पाओगे कि Fish Farming Industry Unorganized  है। फिर भी फिश फार्मिंग और उसके प्रोडक्ट्स से 45000 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हर साल करते हैं। अब आप इसकी वॉल्यूम और क्षमता को बस इमेजिन करिए। 10 से 12% की ग्रोथ हर साल इस इंडस्ट्री से हो रही है। आप किसी भी इंडस्ट्री से हों, अगर आप किसी प्रकार की चीज का प्रोडक्शन कर रहे हैं, तो आपको एक मार्केट चाहिए होती है। जहां पर आप उस सामान को बेच सकें। लेकिन इस मार्केट में डिमांड और सप्लाई का Hues Gap है।  इसमें प्रोडक्शन 12 मिलियन मेट्रिक टन है, और  कंजप्शन 20 मिलियन मेट्रिक टन  है। तो आपके पास मार्केट पहले से बना हुआ है, जहां आप अपनी मछली को आसानी से  बेच सकते हैं। भारत में मछली का पर कैपिटा प्रोडक्शन 6.5 KG है। जो कि विश्व स्तर के हिसाब से बहुत कम है। विश्व में मछली का प्रोडक्शन  20 किलो है। तो हमारे पास बहुत से ऐसे कारण हैं जिससे कि हम यह समझ सकते हैं, कि हमें मछली पालन क्यों करना चाहिए।

 मछली पालन कहां करें

मछली पालन कहां करें इसके लिए हमें पहले यह देखना होगा, कि जो  मछली पालन की चार पद्धतियां बताई गई हैं, उस में से किस पद्धति में आपको पालन करना है। उसी के अनुसार ही हमें अपनी लोकेशन निर्धारित करनी चाहिए। मछली पालन के लिए हमारे पास सबसे पहले साइट  सिलेक्शन होनी चाहिए अगर  हमें केज कल्चर करना है, तो हमारे पास रिजर्व वायर या डैम होना चाहिए जो कि आसानी से सरकार से लीज पर मिल जाए।

      अगर आपको RAS फार्मिंग करनी है, तो ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पर बिजली की समुचित व्यवस्था हो। क्योंकि RAS मैकेनिकल बेस पर आधारित है। तो बिजली का होना सर्वप्रथम आवश्यक है। क्योंकि मछली को  एरिशन  मतलब ऑक्सीजन देना पड़ेगा।  साथ ही ऐसी जगह चुननी चाहिए, कि भविष्य में जब हमें उस जगह को बढ़ाना हो तो आसानी से बढ़ाया जा सके।

   दूसरी शर्त यह है कि ट्रांसपोर्ट की दृष्टि से जगह ऐसी होनी चाहिए जहां पर वाहन आसानी से पहुंच सके। सीड सप्लाई के लिए वहां पर एक हेचडी होनी चाहिए, ऐसा ना हो कि आप ऐसी जगह सेलेक्ट करें, जहां पर वाहन या बिजली की कनेक्टिविटी ही ना हो। तो हमें लोकेशन आईडेंटिफाई करने से पहले इन सब चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

 मछली पालन कब करें

 मछली पालन कब करें, यह डिसाइड करने के लिए हमें टेंपरेचर और क्लाइमेट का बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हम उत्तर भारत में कर रहे हैं तो यह मान के चलिए कि आपका कल्चर का समय 9 महीने का ही होगा। क्योंकि नवंबर, दिसंबर और जनवरी में सर्दी कितनी पड़ती है, कि इन 3 महीनों में कल्चर नहीं होगा। कुछ जो कैट फिश मछली होती हैं वह इस मौसम में सरवाइव नहीं  करेंगी।  बाकी मछली जैसे IMC या CARP FISH हैं, वह सरवाइव तो करेंगी, लेकिन उनकी ग्रोथ नहीं होगी। तो हमें पर्फेक्ट समय के हिसाब से सीड को स्टार्ट करना, हार्वेस्ट करना और सेल करना चाहिए।

         हमारा टारगेट होना चाहिए की मार्च-अप्रैल तक  सीड को स्टॉक कर लें तथा नवंबर तक उसे हार्वेस्ट कर देना चाहिए। दक्षिण भारत का जो मौसम है वह इस प्रकार का है कि वहां पर 12 महीने मछली पालन कर सकते हैं। तो वहां पर कोई परेशानी नहीं आती है।

 इसके साथ ही हमारे साथ अच्छा कंसलटेंट होना चाहिए या एक अच्छा डॉक्टर होना चाहिए या फिर हमने खुद अच्छी ट्रेनिंग ली हो। क्योंकि कोई भी बिजनेस पार्ट टाइम बिजनेस नहीं होता है, जब तक हमें उस बिजनेस की बेसिक ना पता हो, तब तक हमें उस बिजनेस को नहीं करना चाहिए, नहीं तो नुकसान के चांसेस बढ़ जाते हैं।

 निष्कर्ष

  मछली पालन करने से पहले हमें यह सब शर्तें तो देखनी ही चाहिए। साथ में फिश फार्मिंग की इकोनॉमिक्स को भी समझना चाहिए। जो भी फिश फार्मिंग करना चाहता है, अगर वह मतष्य परिवार से नहीं है, तो  सबसे पहले फिश इकोनॉमिक्स को  समझना पड़ेगा। आप क्या इनपुट लगाएंगे? आपको क्या आउटपुट मिलेगा? तथा इन सब चीजों से क्या प्रॉफिट होगा। क्योंकि कोई भी बिजनेस प्रॉफिट के लिए ही किया जाता है। फिश फार्मिंग का पूरा बिजनेस ऑपरेशन पर आधारित है तथा पूरी Coasting का लगभग 75% ऑपरेशन में ही लग जाता है। अब अगर प्रॉफिट की बात करें, तो 40 से 45% तक प्रॉफिट निकल कर आता है।

         अब आप समझ गए होंगे कि मछली पालन की विधि क्या है? मछली पालन कहां करें, कब करें और कैसे करें। अगर जानकारी आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद