ऐसी जानकारी जिससे आप अपनी मछली को बीमारियों से बचाकर लाखों कमा सकते हैं

मछली पालन में कुछ ऐसी जानकारी आपको होनी चाहिए जिससे आप अपनी मछलियों को बीमारियों से बचा सके। मछलियों को समय-समय पर एग्जामिन करने की जरूरत होती है, जिससे कि उनको कोई बीमारी या किसी प्रकार की कोई समस्या हो तो उसका समय रहते पता लग जाए जिससे हम मछली पालन में भारी नुकसान से बच सकें।
 हेलो फ्रेंड्स स्वागत है आपका आपने Blog Pvraqua पर। आज के Topic में हम जानेंगे ऐसी जानकारी जिससे आप अपनी मछलियों को बीमारियों से बचा कर लाखों कमा सकते हैं

Pre Medical Test

प्री मेडिकल टेस्ट दोस्तों कई बार आपने देखा होगा की यदि कोई मरीज डॉक्टर के पास दवाई लेने जाता है तो डॉक्टर उसे प्रिसक्रिप्शन लिखने से पहले उस मरीज के टेस्ट करवाता है, उन मेडिकल टेस्ट के आधार पर उस मरीज को दवाई देता है। उसी प्रकार हम मछलियों के साथ भी करेंगे। आपने कई बार नोटिस किया होगा लोग शिकायत करते हैं कि उनकी मछली खाना नहीं खा रही है, या उसकी स्किन में कोई प्रॉब्लम है, उनका रंग पीला हो गया है आदि यह सब समस्याएं आती हैं उसके लिए प्री मेडिकल टेस्ट जरूरी है। उसे हमें यह पता लगता है कि मछली को क्या समस्या है।
अगर आपको लगता है कि आपकी मछली में कोई बीमारी है, तो सबसे पहले कुछ पैरामीटर्स आपको जांच लेने चाहिए और उसके बाद उन परमीटर्स की रिपोर्ट एक्सपर्ट के साथ शेयर करनी चाहिए। जिससे एक्सपर्ट सही बीमारी पकड़ कर इलाज कर सके।
अमोनिया
नाइट्रेट
नाइट्राइट
dissolved oxygen
pH
Temperature
आपको इन water parameters की जांच करनी चाहिए।
अब अगर आप बायोफ्लोक में मछली पालन कर रहे हैं तो आपको कोई समस्या आ रही है, तब आपको कार्बन तथा नाइट्रोजन का रेशियो कितना है। कार्बन का सोर्स क्या है, मोलसिस है या जैग्री है। साथ मे कॅल्शियम, मग्निसियम तथा फास्फोरस का रशियो क्या है। फ्लॉक् density क्या है। अगर ये सभी जानकारी आप अपने एक्सपर्ट के साथ शेयर करेंगे तो निश्चित ही आपको समस्य्यों से छुटकारा मिल जाएगा। इससे आप मछली पालन के क्षेत्र में अच्छा मुनाफा भी उठा पायेंगे।
उम्मीद करते हैं आपको ये जानकारी पसंद आई होगी। धन्यवाद्। इसी जानकारी को वीडियो के रूप में देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Biofloc PVR Aqua

मछली पालन की विधि क्या है मछली पालन कहां करें कब करें और कैसे करें

हेलो फ्रेंड्स स्वागत है आपका अपने Blog PvrAqua  पर,  यहां पर आपको मछली पालन से संबंधित सभी जानकारियां मिलती हैं। आज हम बात करेंगे Fish Farming Overview की। मतलब कि आप इस टॉपिक में जानेंगे कि मछली पालन की विधि क्या है मछली पालन कहां करें कब करें और कैसे करें तो शुरू करते हैं।

    मछली पालन की बहुत सी पद्धतियां हैं जिनके द्वारा मछली पाली जाती हैं। इसमें से 4 तरीके मुख्य हैं, जिनको आप लोगों ने फेसबुक, यूट्यूब आदि जगहों पर देखा सुना होगा।

मछली पालन के तरीके

Biofloc Technology

यह केमिकल Solution Base तरीका है, यह काफी फेमस है। इसके बारे में हम अपने अगले टॉपिक पर विस्तार से जानेंगे।

 RAS Culture

इसके बारे में भी आपने बहुत सुना होगा यह एक मैकेनिकल सलूशन है, जिसमें हम मशीनों के द्वारा पानी को साफ करते  हैं।

 Case Culture

 इसमें हम case के छोटे-छोटे फ्लोटिंग बॉडी के रूम बना लेते हैं। जो बड़े रिजर्वॉयर या डैम हैं, उनमें यह पालन पालन होता है। जिसमें कि मछलियां पकड़ी जा सकें। बड़े डैम या रिजर्वायर से मछली पकड़ने में बहुत परेशानी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए Case Culture की उत्पत्ति हुई।

Pond culture

 यह पद्धति सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा प्रचलित है, इसे बड़ी आसानी से किया जा सकता है। इसे अपने गांव के तालाब में या अपने खेतों में  तालाब बनाकर भी किया जा सकता है।

 फिश फार्मिंग क्यों करें

अगर हम देखें कि हमें मछली  पालन क्यों करना चाहिए, तो अगर आप अपने क्षेत्र की नॉर्मल फसल को लें जैसे कि अगर आप उत्तर भारत से हैं, तो आपको आपकी मेन फसल गन्ना, गेहूं, धान आदि होंगे। अगर मछली पालन की तुलना इन फसलों से करें तो आप पाएंगे कि फिश फार्मिंग में अन्य की तुलना में  4 गुना अधिक मुनाफा है।  मतलब साफ है इसमें आप अधिक प्रॉफिट उठा सकते हैं। हमारे भारत में मछली का 12 मिलियन मेट्रिक टन प्रोडक्शन होता है। जिसमें से लगभग 70  प्रतिशत मतलब 8.5 मिलियन मेट्रिक टन प्रोडक्शन इन्ही चारों पद्धतियों से होता है। बाकी के 30 % समुद्री मछलियों से आता है।

         अगर आप देखोगे तो पाओगे कि Fish Farming Industry Unorganized  है। फिर भी फिश फार्मिंग और उसके प्रोडक्ट्स से 45000 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हर साल करते हैं। अब आप इसकी वॉल्यूम और क्षमता को बस इमेजिन करिए। 10 से 12% की ग्रोथ हर साल इस इंडस्ट्री से हो रही है। आप किसी भी इंडस्ट्री से हों, अगर आप किसी प्रकार की चीज का प्रोडक्शन कर रहे हैं, तो आपको एक मार्केट चाहिए होती है। जहां पर आप उस सामान को बेच सकें। लेकिन इस मार्केट में डिमांड और सप्लाई का Hues Gap है।  इसमें प्रोडक्शन 12 मिलियन मेट्रिक टन है, और  कंजप्शन 20 मिलियन मेट्रिक टन  है। तो आपके पास मार्केट पहले से बना हुआ है, जहां आप अपनी मछली को आसानी से  बेच सकते हैं। भारत में मछली का पर कैपिटा प्रोडक्शन 6.5 KG है। जो कि विश्व स्तर के हिसाब से बहुत कम है। विश्व में मछली का प्रोडक्शन  20 किलो है। तो हमारे पास बहुत से ऐसे कारण हैं जिससे कि हम यह समझ सकते हैं, कि हमें मछली पालन क्यों करना चाहिए।

 मछली पालन कहां करें

मछली पालन कहां करें इसके लिए हमें पहले यह देखना होगा, कि जो  मछली पालन की चार पद्धतियां बताई गई हैं, उस में से किस पद्धति में आपको पालन करना है। उसी के अनुसार ही हमें अपनी लोकेशन निर्धारित करनी चाहिए। मछली पालन के लिए हमारे पास सबसे पहले साइट  सिलेक्शन होनी चाहिए अगर  हमें केज कल्चर करना है, तो हमारे पास रिजर्व वायर या डैम होना चाहिए जो कि आसानी से सरकार से लीज पर मिल जाए।

      अगर आपको RAS फार्मिंग करनी है, तो ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पर बिजली की समुचित व्यवस्था हो। क्योंकि RAS मैकेनिकल बेस पर आधारित है। तो बिजली का होना सर्वप्रथम आवश्यक है। क्योंकि मछली को  एरिशन  मतलब ऑक्सीजन देना पड़ेगा।  साथ ही ऐसी जगह चुननी चाहिए, कि भविष्य में जब हमें उस जगह को बढ़ाना हो तो आसानी से बढ़ाया जा सके।

   दूसरी शर्त यह है कि ट्रांसपोर्ट की दृष्टि से जगह ऐसी होनी चाहिए जहां पर वाहन आसानी से पहुंच सके। सीड सप्लाई के लिए वहां पर एक हेचडी होनी चाहिए, ऐसा ना हो कि आप ऐसी जगह सेलेक्ट करें, जहां पर वाहन या बिजली की कनेक्टिविटी ही ना हो। तो हमें लोकेशन आईडेंटिफाई करने से पहले इन सब चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

 मछली पालन कब करें

 मछली पालन कब करें, यह डिसाइड करने के लिए हमें टेंपरेचर और क्लाइमेट का बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हम उत्तर भारत में कर रहे हैं तो यह मान के चलिए कि आपका कल्चर का समय 9 महीने का ही होगा। क्योंकि नवंबर, दिसंबर और जनवरी में सर्दी कितनी पड़ती है, कि इन 3 महीनों में कल्चर नहीं होगा। कुछ जो कैट फिश मछली होती हैं वह इस मौसम में सरवाइव नहीं  करेंगी।  बाकी मछली जैसे IMC या CARP FISH हैं, वह सरवाइव तो करेंगी, लेकिन उनकी ग्रोथ नहीं होगी। तो हमें पर्फेक्ट समय के हिसाब से सीड को स्टार्ट करना, हार्वेस्ट करना और सेल करना चाहिए।

         हमारा टारगेट होना चाहिए की मार्च-अप्रैल तक  सीड को स्टॉक कर लें तथा नवंबर तक उसे हार्वेस्ट कर देना चाहिए। दक्षिण भारत का जो मौसम है वह इस प्रकार का है कि वहां पर 12 महीने मछली पालन कर सकते हैं। तो वहां पर कोई परेशानी नहीं आती है।

 इसके साथ ही हमारे साथ अच्छा कंसलटेंट होना चाहिए या एक अच्छा डॉक्टर होना चाहिए या फिर हमने खुद अच्छी ट्रेनिंग ली हो। क्योंकि कोई भी बिजनेस पार्ट टाइम बिजनेस नहीं होता है, जब तक हमें उस बिजनेस की बेसिक ना पता हो, तब तक हमें उस बिजनेस को नहीं करना चाहिए, नहीं तो नुकसान के चांसेस बढ़ जाते हैं।

 निष्कर्ष

  मछली पालन करने से पहले हमें यह सब शर्तें तो देखनी ही चाहिए। साथ में फिश फार्मिंग की इकोनॉमिक्स को भी समझना चाहिए। जो भी फिश फार्मिंग करना चाहता है, अगर वह मतष्य परिवार से नहीं है, तो  सबसे पहले फिश इकोनॉमिक्स को  समझना पड़ेगा। आप क्या इनपुट लगाएंगे? आपको क्या आउटपुट मिलेगा? तथा इन सब चीजों से क्या प्रॉफिट होगा। क्योंकि कोई भी बिजनेस प्रॉफिट के लिए ही किया जाता है। फिश फार्मिंग का पूरा बिजनेस ऑपरेशन पर आधारित है तथा पूरी Coasting का लगभग 75% ऑपरेशन में ही लग जाता है। अब अगर प्रॉफिट की बात करें, तो 40 से 45% तक प्रॉफिट निकल कर आता है।

         अब आप समझ गए होंगे कि मछली पालन की विधि क्या है? मछली पालन कहां करें, कब करें और कैसे करें। अगर जानकारी आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद