मछली पालन में लागत और मुनाफा – Costs And Profits In Fisheries

आज के इस टॉपिक में समझाने की कोशिश करेंगे की मछली पालन में कितनी लागत आती है कितना मुनाफा होता है। हम कोई भी बिजनेस फायदे के लिए ही करते है, अगर उस बिजनेस में फायदा ना हो तो हम उसे क्यों करेंगे इसी प्रकार मछली पालन भी इसी तर्ज पर चलता है। आज के इस टॉपिक में हम ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात करेंगे जिन्हें समझ कर आप मछली पालन से मुनाफा बनाने में जरूर सक्षम होंगे। तो जानते हैं मछली पालन में लागत और मुनाफा। दोस्तों स्वागत है आपका आपके ब्लॉग Pvraqua पर

दोस्तों कोई बिजनेस शुरू करने के लिए उसके इंफ्रा की जरूरत होती है उसके लिए एक Setup होना चाहिए जहां की वह बिजनेस सुचारू रूप से चलाया जा सके। इसी प्रकार मछली पालन में भी अलग-अलग प्रकार की पद्धतियां है जिन्हें हम 1-1 कर के जानेंगे तो सबसे पहले बात करते हैं Cage Culture की।

1.Cage Culture

इसमें हमारे पास बड़ी वाटर बॉडी होनी चाहिए जोकि गवर्नमेंट से लीज पर ली जा सकती है। Cage Cultureको आप ऐसे समझिए की वह 96 मीटर का एक खुला कमरा होता है। जोकि पानी में तैरता रहता है। जिसकी 6 मीटर लंबाई, 6 मीटर चौड़ाई, 4 मीटर गहराई होती है और उसके चारों तरफ जाल लगा हुआ होता है। जाल भी चार प्रकार के होते हैं। जिनको हम अच्छे से Case में लगाते हैं। जिससे कि वाटर बॉडी में अगर तूफान या हवा के तेज बहाव आए तो हमारे Case का जाल टूटे ना। और उस वाटर बॉडी की गहराई 70 से 80 फीट होनी चाहिए।

96 मीटर के एक Case से हम 4 टन प्रोडक्शन 8 से 10 महीने में निकाल पाते हैं। यह जानकारी आपको दी है यह मैंने अपने अनुभव और प्रैक्टिकल के आधार पर दी है। हमारे खुद के Cases हैं जिनका प्रोडक्शन लगभग इतना ही रहता है। एक Case की डेवलपमेंट Cost करीब 1 लाख 20 हजार आती है। लेकिन हर चीज के गुण और दोष दोनों होते हैं, इसमें हमें एक साथ 12 Case लगाने अनिवार्य है। मतलब की आप 12 से कम Case नहीं लगा सकते, 12 के मल्टीपल में आप कितने भी लगा सकते हैं परंतु 12 से कम नहीं। क्योंकि फिर आप इसकी लेबर कॉस्टिंग नहीं निकाल पाएंगे। जैसा कि आप लोगों ने सुना होगा लोग कहते हैं कि मैंने फिश फार्मिंग करी और मेरा बिजनेस फेल हो गया उसका कारण यही होता है की वह लोग उसकी कैलकुलेशन नहीं करते जिसकी वजह से यह सब परेशानियां आती है। तो हमारी Case के लिए Per Ton डेवलपमेंट Cost 30 हजार आती है।

2. Pond Culture

अब हम Pond कल्चर की बात करेंगे। हमें एक तालाब कम से कम 1 एकड़ का बनाना चाहिए। इस तालाब को बनाने के लिए हमारी कॉस्टिंग लगभग ढाई लाख रुपए आती है। जिसमें की Pond बनाना, पानी की व्यवस्था करना, शेल्टर बनाना, तथा मोटर का अरेंजमेंट करना भी शामिल है। अगर आप imc पद्धति में फिश फार्मिंग कर रहे हैं तो 1 एकड़ में 5 टन प्रोडक्शन आसानी से निकाल सकते हैं। लेकिन यदि आप Catfish कर रहे हैं तो आप 15 से 18 टन प्रोडक्शन आसानी से निकाल सकते हैं।अगर आप imc कर रहे हैं तो आपके डेवलपमेंट कॉस्ट लगभग 50000 आती है।

3. Biofloc

इसी में तीसरी पद्धति Biofloc है जोकि इस समय बहुत तेजी से चल रहा है। Biofloc मैं छोटे-छोटे वाटर टैंक और छोटी-छोटी वाटर बॉडी बनानी पड़ती है। उसमें 30kg/ मीटर क्यूब के हिसाब से हम बायोमास रेडी कर सकते हैं। इसमें हम कैटफिश का पालन ही करते हैं जिनका साइज 50 ग्राम से 200 ग्राम होता है क्योंकि यही अच्छे से ग्रो कर पाते हैं अगर हम कैलकुलेशन करें तो दो लाख/Ton डेवलपमेंट cost आएगी।

4.IPRS

यह मिनिमम 1 हेक्टेयर का प्रोजेक्ट है । इससे कम मैं शायद आपको उतना अच्छा रिजल्ट नहीं मिलेगा। इसमें जो अच्छी कंपनी है वह एक हेक्टेयर से 70 टन प्रोडक्शन का क्लेम करती हैं और उसकी कॉस्टिंग लगभग ₹9000000 है इसमें हम कैटफिश और IMC का पालन करते हैं।

5.RAS

अगर आप 180 मीटर क्यूब का RAS लगाते हैं तो इसमें हम 50KG/ मीटर क्यूब तक जा सकते हैं। इसके लिए आपको 30 मीटर क्यूब के 6 टैंक लगाने पड़ेंगे और इसकी costing लगभग 75 लाख आती है।

हमें कोई सी भी बात करनी हो उसके लिए सबसे पहले हर पहलू को जांच कर तब की आगे की प्लानिंग करनी चाहिए। हमारे फेलियर का सबसे बड़ा कारण है कि हम कैलकुलेशन नहीं करते हैं कि कितना फंड लगाना है और कितना रिटर्न आएगा। हम शुरु कर देते हैं फिर भी स्टॉक कर लेते हैं लेकिन जब फिश को फीड खिलाने की बारी आती है तो हमें लगता है कि हमारे पास फंड खत्म हो गया है जिसकी वजह से फिश की mortality rate बढ़ती है और मछली अच्छे से ग्रोथ नहीं कर पाती।
जो लोग भी बिना इन चीजों की प्लानिंग के फिश फार्मिंग करते हैं उनको बिजनेस में लॉस होता है और फिर भी बोलते हैं कि बिजनेस फेल हो गया इसे कोई ना करें अगर आपको फैलियर से बचना है तो आपको बेस्ट हेचडी से सीख लेना चाहिए और हर एक कॉस्टिंग की कैलकुलेशन अच्छे से कर लेनी चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं आप समझ गए होंगे कि मछली पालन में लागत और मुनाफे का क्या पैमाना है। जानकारी पसंद आई हो तो शेयर करना ना भूले इसी जानकारी को यदि आप वीडियो के रूप में देखना चाहते हैं तो हमारे Pvraqua के Youtube चैनल पर संपर्क कर सकते हैं इसी जानकारी को वीडियो के रूप में देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें धन्यवाद।

https://www.youtube.com/watch?v=eRm52VoO_Sw

 

 

मछली पालन के लिए अनिवार्य बातें

मछली पालन के लिए कुछ पैरामीटर्स होते हैं जिन्हें हर मछली पालक को पता होना चाहिए। अगर आप मछली पालन कर रहे हैं, तो ऐसी बेसिक नॉलेज आपके पास होनी ही चाहिए। आज के इस टॉपिक में हम बात करने वाले हैं। मछली पालन के लिए कुछ अनिवार्य बातें तो फ्रेंड्स स्वागत है, आपका आपके अपने Blog Pvraqua पर, तो शुरू करते हैं।

ऐसे बहुत से Fish Farmers हैं, जो मछली पालन कर रहे हैं, और उनके पास बेसिक चीजें जैसे- वाटर टेस्टिंग किट, Ph मीटर, DO ऑक्सीजन  Kit, थर्मामीटर आदि चीजें नहीं हैं। उनकी मछलियों में प्रॉब्लम होती है, मछली की मृत्यु दर बढ़ जाती है। फिर वह किसी से पूछते हैं, कि ऐसा क्यों हो रहा है। इसकी क्या वजह है? तो एक्सपर्ट उनसे पूछता है कि पानी का Ph कितना है, DO क्या है, टेंपरेचर कितना है, तो वह कुछ बता नहीं पाते क्योंकि उनको इस बारे में पता ही नहीं है उनको बेसिक नॉलेज ही नहीं है, और ना ही उनके पास यह सब सामान ही मौजूद है।

तो मेरी आप सब से रिक्वेस्ट है जो भी मछली पालन कर रहे हैं तो उनके पास यह बेसिक  जानकारी के साथ-साथ यह बेसिक  kits  का भी होना बहुत जरूरी है आज हम इन्हीं सब को लेकर कुछ टॉपिक पर बात करेंगे

1  सनलाइट

हमारा एक इकोसिस्टम है जिसमें Living Things और Non Living Things दोनों ही रहते हैं। जिससे हमारा फूड Cycle रोटेट होता रहता है। इसे ही इकोसिस्टम सिस्टम कहते हैं। हमारा पूरा इकोसिस्टम प्रकाश  पर ही निर्भर है। प्रकाश एक ऊर्जा है जो हमें महसूस कराती है कि हमारा टेंपरेचर गर्म है या ठंडा। पूरा इकोसिस्टम तीन Cycle पर चलता है।

कार्बन cycle

वाटर cycle

नाइट्रोजन cycle

आप सबको इन तीनों के बारे में जरूर पढ़ना और जाना चाहिए।

वाटर cycle

जैसा कि आप जानते हैं कि पानी कहीं पर भरा हुआ है फिर  वाष्पोत्सर्जन के जरिए भाग में बदलकर बादल बनता है फिर वह बादल पुनः  पानी के रूप में  बरस जाता है। मतलब कि पानी भाफ बन कर फिर धरती पर बारिश के रूप में आ गया यह cycle चलती रहती है।

कार्बन cycle

कार्बन हर जगह पर पाया जाता है, यह दो रूपों में होता है- फोटोसिंथेसिस  और रेपुटेशन  जैसा कि पेड़ पौधे CO2 लेते हैं और  ऑक्सीजन छोड़ते हैं। उसी प्रकार मनुष्य ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन    डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।  हमारी Fish, feed और ऑक्सीजन लेती हैं तथा CO2 और अमोनिया छोड़ती हैं। यह पूरी कार्बन cycle होती है।

नाइट्रोजन cycle

हमारे वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन है इसमें हमें यह जानना है कि नाइट्रोजन का अमोनिफिकेशन कैसे हो रहा है इसके बाद में नाइट्रिफिकेशन से नाइट्राइट बनता है। इसके बाद ऑक्सीकरण की प्रक्रिया से दोबारा नाइट्रोजन बन जाता है तो इन सब के बारे में आपको अच्छे से पढ़ना और जानना बहुत जरूरी है।

जो भी फिश फार्मिंग करना चाहता है या कर रहा है उसे यह पता होना चाहिए कि  उनके पौंड के bottom मैं अमोनिया कैसे बनता है। यह पता होना चाहिए कि  कब कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा या कम है कब ऑक्सीकरण या  नाइट्रीकरण कराना है।

कार्बन डाइऑक्साइड और  अल्कलिनिटी

यह दोनों हमारे नॉर्मल Aquaculture में जरूरी भूमिका अदा नहीं करते हैं। लेकिन अगर हमारी हेचरी है,  जहाँ हमारी ब्रीडिंग पूल्स हैं, वहाँ पर इनकी बहुत जरूरत होती है। अगर कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा है तो हमारे जो स्पोर्ट्स हैं वह सही से डिवेलप नहीं हो पाते हैं अगर अल्कलिनिटी को देखें तो fry size  मछली  या उससे भी छोटे होते हैं तो उनका सर्वाइवल रेट कम आता है आपने नोटिस किया होगा अगर आप का सीड कोलकाता वगैरह से नॉर्थ इंडिया में आता है तो शुरुआत में मृत्यु दर बहुत अधिक रहती है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वहां पर अल्कलिनिटी बहुत कम है और हमारे यहां बहुत अधिक

तापमान

टेंपरेचर Aquaculture के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है तापमान की माप के लिए हमारे पास थर्मामीटर होना चाहिए जिसके द्वारा हम समय-समय पर अपने तालाब या पाउंड का आप चेक कर सके मछली पालन के लिए पानी का टेंपरेचर 20 डिग्री से 28 डिग्री होना चाहिए इससे कम या ज्यादा टेंपरेचर fish  की मेटाबॉलिज्म  के लिए अच्छा नहीं होता है

 Ph लेवल

अगर हम पीएच लेवल की बात करें तो 7:00 से 9:00 तक अच्छा माना जाता है अगर पीएच 9.5 से अधिक है तब यह मछलियों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है इसकी बॉडी  का ph4 से 4.5  होता है। अगर पीएच को देखें तो बॉडी से वाटर का पीएच अधिक होना चाहिए पानी का पीएच अगर कम है तो उसमें तू ना मिलाया जाता है अगर अधिक है तो उसमें जिप्सम मिलाते हैं।

 Areation for D O

मछली पालन में  DO  बहुत महत्व है कुछ मछली पालन तालाब को तैयार करते हैं किंतु उस में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं करते। ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए अगर आप सीजन का लेवल अधिक रहेगा तो अमोनिया बढ़ने के चांस बहुत कम रहते हैं। फिश प्रोडक्शन भी बढ़ता है तो आपको Areation पर जरूर ध्यान देना चाहिए आप आर्टिफिशियल Areation   दे  या नेचुरलAreation   पर इसका प्रबंध जरूर करें

Feeding

फीडिंग फिश फार्मिंग में बहुत अहम भूमिका निभाता है सिडको 4 कैटेगरी में बांटना चाहिए 1 एमएम 2 एमएम 3 एमएम 4 एमएम जैसे-जैसे फेस का साइज बढ़ता है फिर का साइज भी बढ़ाना चाहिए सीट कितना कब और किस मात्रा में देना चाहिए इसके लिए आपको डिटेल में अगले टॉपिक में जानने को मिलेगा।

 सैलिनिटी

इसका मतलब   साल्ट का कितना कंपोजीशन पानी में है अगर हम  महीने में एक बार नमक मिला दें तो तालाब में फंगल इन्फेक्शन को रोका जा सकता है हमें इसका भी ध्यान रखना चाहिए।

तो फ्रेंड यह कुछ बेसिक प्वाइंट थे जिन्हें फिश फार्मिंग करते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए। अगर हमें फिश फार्मिंग करनी है या कर रहे हैं तो  इस बेसिक जानकारी का होना बहुत जरूरी है। अगर जानकारी पसंद आई हो तो इसे शेयर करना बिल्कुल ना भूलें धन्यवाद